सरकार ने आश्वासन दिया है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-यू.जी.सी. के नए दिशा-निर्देशों का उद्देश्य शिक्षा परिसरों में जाति-आधारित भेदभाव को रोकना हैं और इनका दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कल संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि यह केंद्र, राज्य सरकारों और यू.जी.सी. की जिम्मेदारी है कि भेदभाव के नाम पर कानून का दुरुपयोग न हो। उन्होंने कहा कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में है और सभी कार्रवाई संविधान के दायरे में ही की जाएगी।
13 जनवरी को जारी एक नियम में यू.जी.सी. ने कहा था कि उच्च शिक्षा संस्थानों को जाति आधारित या किसी भी प्रकार के भेदभाव से निपटने के लिए समान अवसर केंद्र, समता समितियां, शिकायत निवारण प्रणाली और चौबीसों घंटे चलने वाली हेल्पलाइन स्थापित करना अनिवार्य है। सरकार के अनुसार इन उपायों का उद्देश्य सभी छात्रों के लिए सुरक्षित और अधिक समावेशी शिक्षण वातावरण बनाना और भेदभाव विरोधी ढांचे को मजबूत करना है।