संस्कृति मंत्रालय नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के उपलक्ष्य में आज से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पराक्रम दिवस-2026 का आयोजन कर रहा है। स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चन्द्र बोस के जीवन और विरासत से जुड़े देश भर के 13 अन्य स्थानों पर भी यह उत्सव मनाया जाएगा। यह उत्सव उनके साहस, बलिदान और देशभक्ति की अमर विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है। राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के स्वतंत्रता के आह्वान ने लाखों भारतीयों में साहस, आत्मविश्वास, एकता और राष्ट्रवाद की भावना को जगाया। राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने आज़ाद हिंद फौज के माध्यम से भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को निर्णायक नेतृत्व प्रदान किया और इसे वैश्विक मंच तक पहुंचाया। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि नेताजी की विरासत प्रत्येक भारतीय को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का निडर नेतृत्व, अदम्य साहस और भारत की स्वतंत्रता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता पराक्रम का सच्चा सार है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे आने वाली पीढ़ियों को साहस, बलिदान और राष्ट्रीय एकता के आदर्शों को कायम रखने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज के दिन देशवासी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के प्रति अद्वितीय योगदान को स्मरण करते हैं। श्री मोदी ने कहा कि वे निडर नेतृत्व और अटूट देशभक्ति के प्रतीक थे तथा उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों को एक मजबूत देश के निर्माण के लिए प्रेरित करते रहेंगे। श्री मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से नेताजी के सम्मान में देश भर में शुरू की गई कई पहलों का उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी के मध्य में इंडिया गेट के निकट नेताजी की भव्य प्रतिमा की स्थापना गुलामी की मानसिकता को त्यागने तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति श्रद्धा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि लाल किले में स्थित क्रांति मंदिर संग्रहालय में नेताजी बोस और भारतीय नौसेना से संबंधित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक सामग्री मौजूद है।
श्री मोदी ने 2018 में लाल किले में आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ को याद किया। उन्होंने यह भी कहा कि उसी वर्ष तीन प्रमुख द्वीपों का नाम भी बदला गया था, जिनमें रॉस द्वीप भी शामिल है, जिसका नाम बदलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप कर दिया गया था।