रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने किया भारतीय सैन्य विरासत महोत्सव के तीसरे संस्करण का उद्घाटन

 
 
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और तकनीकी प्रगति को मज़बूत करते हुए भारत की सैन्य विरासत के संरक्षण के महत्व पर ज़ोर दिया। नई दिल्ली स्थित यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ़ इंडिया में तीसरे भारतीय सैन्य विरासत महोत्सव के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए श्री सेठ ने यह बात कहीं। उन्‍होंने सेना की सेवा, अनुशासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की और ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों में उसके नेतृत्व की सराहना की।
 
 
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि स्वदेशीकरण, नवाचार और उभरती हुई तकनीकों को अपनाना भारत की रक्षा तैयारियों का केंद्र बिंदु बना हुआ है। एक मज़बूत घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के महत्व पर ज़ोर देते हुए उन्‍होंने कहा कि उद्योग और युवाओं की बढ़ती भागीदारी दीर्घकालिक रणनीतिक क्षमता हासिल करने और वैश्विक रक्षा जुड़ाव का विस्तार करने के देश के सामूहिक संकल्प को दर्शाती है। उन्होंने नागरिकों से बिरसा मुंडा की जयंती की पूर्व संध्या पर अपने सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल चित्रों को बिरसा मुंडा से अपडेट करने का भी आग्रह किया और भारत की एकता और स्वतंत्रता के मार्ग को आकार देने में सरदार वल्लभभाई पटेल सहित राष्ट्रीय नेताओं के योगदान को याद किया।
 
 
रक्षा राज्‍य मंत्री ने प्रमुख प्रकाशनों का विमोचन किया, जिनमें “शुक्र नीति: शासन कला और युद्धकला”, भारतीय सशस्त्र बलों के सम्मान और पुरस्कार, और भारत के शांति स्थापना में 75 वर्षों के योगदान पर एक पुस्तक शामिल है। दो दिवसीय महोत्सव में पैनल चर्चाएं, प्रदर्शनियां और संवाद शामिल हैं, जिनका उद्देश्य देश के सैन्य इतिहास के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना और विरासत को समकालीन राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं से जोड़ना है।
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