वित्तीय सेवा विभाग के अनुसार निर्यात भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है, जो सकल घरेलू उत्पाद-जी.डी.पी. का लगभग 21 प्रतिशत है और इससे देश को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भी मिलती है। निर्यात क्षेत्र में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 4 करोड़ 50 लाख से अधिक लोग कार्यरत हैं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम उद्योग-एम.एस.एम.ई. देश के कुल निर्यात में लगभग 45 प्रतिशत का योगदान करते हैं और आर्थिक स्थिरता और विकास को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि वित्तीय सेवा विभाग ने निर्यात प्रतिस्पर्धा को सुदृढ़ करने के लिए निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना- सी.जी.एस.ई. लागू की है। जो पहली दिसंबर 2025 से शुरू हो गई है। इससे बैंक और वित्तीय संस्थानों को वैश्विक अनिश्चितता के दौर में निर्यातकों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्रदान करने में सहायता मिलेगी, साथ ही निर्यात बाजारों के विविधीकरण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होगी।
सी.जी.एस.ई. योजना के अंतर्गत, पात्र सदस्य ऋण संस्थानों के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष निर्यातक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को 20 हजार करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त बिना गारंटी वाली ऋण सहायता प्रदान की जा रही है। अभी तक 8,500 करोड़ रुपये की कुल राशि के लिए एक हजार सात सौ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 3 हजार एक सौ करोड़ रुपये से अधिक के 716 आवेदनों को स्वीकृति दी जा चुकी है, जो निर्यातकों और एम.एस.एम.ई. के बीच विश्वास को दर्शाता है।
मंत्रालय ने कहा कि यह योजना मौजूदा निर्यात ऋण या कार्यशील पूंजी सीमा के 20 प्रतिशत तक कार्यशील पूंजी सहायता प्रदान करती है, जिससे निर्यातकों को अपनी क्षमताओं को मजबूत करने, व्यवसाय की निरंतरता सुनिश्चित करने और रोजगार बनाए रखने में सहायता मिलती है। मंत्रालय ने कहा कि सी.जी.एस.ई. इस वर्ष 31 मार्च तक या 20 हजार करोड़ रुपये तक की गारंटी जारी होने तक जारी रहेगी।