ईरान में राजधानी तेहरान सहित देशभर में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। वर्ष 2022 के बाद यह पहला मौक़ा है जब ईरान को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। ये प्रदर्शन ईरान में बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और मुद्रा के अवमूल्यन के विरोध में हो रहे हैं। अमरीका से संचालित मानवाधिकार संस्था ओवरसीज ईरानियन राइट्स ग्रुप के अनुसार, इन प्रदर्शनों में 62 लोग मारे गए हैं। इनमें 14 सुरक्षाकर्मी और 48 प्रदर्शनकारी शामिल हैं। सरकार ने दो हज़ार तीन सौ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। पूरे ईरान में इंटरनेट सेवा लगभग ठप्प है और डिजिटल सेंसरशिप सख्त़ी से लागू की गई है।
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन पिछले वर्ष 28 दिसम्बर को शुरू हुए थे।इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खमैनी ने कल टेलीविज़न संदेश में कहा कि सरकार विदेशी ताक़तों के उकसावे पर उपद्रव कर रहे प्रदर्शनकारियों को बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा देश में चल रहे उपद्रव को आतंकी कार्रवाई बताया और सख़्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
उधर, अमरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा है कि राष्ट्रव्यापी आंदोलन के कारण ईरान गंभीर संकट में है और अमरीका इस मामले पर पैनी नज़र बनाए हुए है। श्री ट्रम्प ने ईरान को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख़्ती के प्रति आगाह किया।
प्रदर्शनकारियों ने सरकारी भवनों, अस्पतालों और मस्जिदों को भी निशाना बनाया है और सरकारी प्रसारण कार्यालयों सहित कई भवनों में आग लगा दी है।