केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा है कि सरकार ने 2014 से कारोबार सुगमता में सुधार के लिए अनगिनत क्रांतिकारी सुधार कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नीतिगत स्थिरता और पारदर्शिता ने निवेश को प्रोत्साहित किया है। वित्त मंत्री आज दोपहर मुंबई में 12वें भारतीय स्टेट बैंक के बैंकिंग और अर्थशास्त्र सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं।
केंद्रीय मंत्री सीतारामन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत को कई बड़े और विश्वस्तरीय बैंकों की ज़रूरत है और इस दिशा में काम शुरू हो गया है। उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र से ऋण उपलब्धता बढ़ाकर विकास को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि बैंकों को विकास को बढ़ावा देने के लिए उत्पादक क्षेत्रों में ऋण प्रवाह को गहरा और व्यापक बनाना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कटौती से मांग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के ज़रिए 4 ट्रिलियन रुपये से ज़्यादा की बचत की है।
केंद्रीय मंत्री सीतारामन ने आर्थिक आत्मनिर्भरता; सामाजिक आत्मनिर्भरता; तकनीकी आत्मनिर्भरता; रणनीतिक आत्मनिर्भरता; और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को ‘आत्मनिर्भर भारत’ के पाँच व्यापक आयाम बताए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के माध्यम से 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में काम 2014 से ही शुरू हो गया था।