उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा है कि शिक्षा का उपयोग असमानताओं को कम करने, हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाने और यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाना चाहिए कि विकास, देश के कोने-कोने तक पहुंचे।
नई दिल्ली में आज जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा न केवल चरित्र निर्माण करती है बल्कि मन को मजबूत बनाकर बुद्धि को बढ़ाती है। श्री राधाकृष्णन ने छात्रों से देश की आर्थिक, सामाजिक और वैज्ञानिक समृद्धि के लिए काम करने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा और उचित प्रशिक्षण, देश के युवाओं को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए सशक्त बनाएगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक और पारंपरिक मूल्यों का एक साथ विकास होना चाहिए। श्री राधाकृष्णन ने कहा कि भारत का इतिहास हमेशा ज्ञान की खोज के लिए प्रेरणा देता रहा है।
उन्होंने सहयोग की आदत विकसित करने का भी आह्वान किया ताकि प्रशासनिक निर्णयों को सुचारू रूप से लागू किया जा सके। उपराष्ट्रपति ने भारतीय भाषाओं में नए अध्ययन केंद्र स्थापित करने के लिए जेएनयू की सराहना की।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संस्थान की समृद्ध विरासत पर श्री प्रधान ने कहा कि जेएनयू मानविकी, सामाजिक विज्ञान, भाषाओं के साथ-साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न विषयों में अग्रणी शिक्षा केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि जेएनयू हमेशा अपने समय से आगे रहा है और विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के कई सिद्धांतों को इसके औपचारिक कार्यान्वयन से पहले ही आत्मसात कर लिया था।