जनवरी 15, 2026 4:42 अपराह्न

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शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का भी साधन है: राष्ट्रपति

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने विद्यार्थियों को सलाह देते हुए कहा है कि शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का एक माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में योगदान देने वाले समाज के प्रति विद्यार्थी ऋणी हैं। विकास की राह में पिछड़ चुके लोगों के उत्थान के प्रयास करना इस ऋण को चुकाने का एक तरीका हो सकता है। राष्ट्रपति ने आज अमृतसर में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के 50वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।

    राष्ट्रपति ने कहा कि औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में शामिल होंगे या अपना खुद का व्यवसाय शुरू करेंगे। उन्हें कुछ ऐसे गुणों पर ध्यान देने की आवश्यकता है जो हर क्षेत्र में प्रगति के लिए समान रूप से आवश्यक और सहायक हैं। कठिन से कठिन परिस्थिति में निरंतर सीखने की इच्छा और लगन, नैतिक मूल्यों का दृढ़ता से पालन, सत्यनिष्ठा और ईमानदारी जैसे गुण विद्यार्थियों में होने चाहिए। उन्हें परिवर्तन को अपनाना चाहिए और न केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए, बल्कि समाज और राष्ट्र के व्यापक हित के लिए भी सीखना चाहिए।

    राष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह के दौरान कुछ शीर्ष स्नातकों को सम्मानित किया। सम्‍मानित होने वाले स्‍नातकों में अधिकतर महिलाएं थीं। उन्‍होंने गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं का पालन करने के लिए विश्वविद्यालय की सराहना की। राष्‍ट्रपति ने कहा कि महिलाओं को समाज में समान अधिकार दिए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समाज और राष्ट्र के हित में है कि महिलाओं को पूर्ण आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के अवसर मिलें और सभी को इसके लिए प्रयास करने चाहिए।