देव दीपावली आज उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मनाई जा रही है। इसे दीपोत्सव के रूप में भी जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा की सुबह शुरू होने वाला यह पर्व देवताओं के पृथ्वी पर अवतरण के उपलक्ष्य में पवित्र गंगा नदी के किनारे मनाया जाता है। श्रद्धालु अपनी आत्मा की शुद्धि के लिए पवित्र गंगा में स्नान करते हैं।
गोधूलि बेला में घरों, मंदिरों और घाटों पर हज़ारों दीये जलाए जाते हैं और दीपदान किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह दिव्य प्राणियों को पृथ्वी लोक की ओर ले जाता है। पुजारियों द्वारा मंत्रोच्चार, शंखनाद और लयबद्ध घंटियों के साथ की जाने वाली गंगा आरती शाम का मुख्य आकर्षण होगी।
देव दीपावली का अर्थ है ‘देवताओं की दिवाली’। यह अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है। देव दीपावली, दिवाली के पंद्रह दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा की रात को मनाई जाती है। मान्यता के अनुसार, आज के दिन देवता पवित्र गंगा नदी में स्नान के लिए पृथ्वी पर उतरते हैं। इस रात, वाराणसी वास्तव में प्रकाश नगरी-काशी बन जाती है, क्योंकि असंख्य दीये देवताओं के स्वागत का दिव्य संदेश देते हैं। दीयों की झिलमिल दीपमालिकाओं का यह अद्भुत मिलन सभी को मंत्रमुग्ध कर देता है। नदी के घाट, मंदिर और छत दीयों की रोशनी से जगमगाते हैं। गंगा नदी में दीयों के प्रतिबिंब से प्रकाश की एक झिलमिलाती आकाशगंगा बन जाती है।