लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि पहली दिसम्बर से 19 दिसंबर तक चलने वाला संसद का शीतकालीन सत्र विधायी कार्यों, सरकारी नीतियों और जन मुद्दों पर सार्थक और व्यवस्थित चर्चा पर केंद्रित होगा।
कोहिमा में आज दोपहर 22वें राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन के उद्घाटन कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से बातचीत में श्री बिरला ने संसद में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने संसद को लोकतंत्र का मंदिर बताया जहाँ संवाद और रचनात्मक बहस नागरिकों की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करे और राष्ट्रीय विकास में योगदान दे।
130वें संविधान संशोधन विधेयक का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने बताया कि एक संयुक्त संसदीय समिति का गठन किया गया है और वह इस मामले पर विचार-विमर्श कर रही है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से समिति की चर्चाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।
श्री बिरला ने शासन और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए संसद और राज्य विधानमंडलों के बीच घनिष्ठ समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने डिजिटल और कागज़ रहित प्रणालियों को अपनाने पर भी जोर डाला और कहा कि अधिकांश राज्य विधानसभाएँ जनता के लिए कार्यवाही को और अधिक सुलभ बनाने के लिए पहले ही डिजिटल कार्यप्रणाली अपना चुकी हैं।
यह दोहराते हुए कि भारत का लोकतंत्र एक जीवंत लोकतंत्र है उन्होंने कहा कि निरंतर नवाचार, विधायकों की क्षमता निर्माण और खुला संवाद शासन को लोगों के प्रति अधिक जवाबदेह बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
राष्ट्रमंडल संसदीय संघ के 22वें वार्षिक सम्मेलन का उल्लेख करते हुए श्री बिरला ने कहा कि यह मंच ज्ञान का आदान-प्रदान करने, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और विधायी कार्यप्रणाली में तकनीकी नवाचारों का पता लगाने के लिए सदस्य राज्यों के विधायकों और प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस तरह की बातचीत से लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत होंगी, विधायी प्रदर्शन में वृद्धि होगी और राज्यों के बीच अधिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।