जनवरी 6, 2026 2:25 अपराह्न

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मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ ने दीपथून स्‍तंभ पर दीपक जलाने की अनुमति का आदेश बरकरार रखा 

मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै खंडपीठ ने तिरुप्पारनकुंड्रम पहाड़ी पर स्थित दीपथून स्‍तंभ पर दीपक  प्रज्ज्वलित करने की अनुमति देने वाले आदेश को बरकरार रखा है।

 

न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन और के.के. रामकृष्णन की खंडपीठ ने कहा कि जिस स्थान पर दीपथून नामक पत्थर का स्तंभ है, वह भगवान सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर का है। पीठ ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से परामर्श के बाद दीपक जलाया जा सकता है। अदालत ने कहा कि इसमें सम्मिलित होने वाले व्यक्तियों की संख्या निर्धारित की जा सकती है।

 

हिंदू मुन्नानी के अधिवक्ता और याचिकाकर्ता निरंजन एस कुमार ने बताया कि खंडपीठ ने कहा है कि दीपक जलाना अनिवार्य है और इसे तिरुप्पारनकुंड्रम पहाड़ी की चोटी पर ही जलाया जाना चाहिए।

 

याचिकाकर्ता राजेश ने भी न्यायालय के आदेश की प्रशंसा की है। उन्‍होंने कहा कि दीपथून के रूप में दीपक जलाया जाना चाहिए और मंदिर प्रशासन को इसके लिए आवश्यक व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की इस मामले में प्रस्तुत दलीलों को अदालत ने खारिज कर दिया है। श्री राजेश ने कहा कि यह फैसला तमिलनाडु में हिंदुओं और भगवान मुरुगन के श्रद्धालुओं की जीत है।

 

पिछले महीने, हिंदू त्यौहार कार्तिकई दीपम के दौरान दक्षिणपंथी समूहों के कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ झड़प के बाद अशांति फैल गई थी। इससे पहले मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने पहाड़ी पर स्थित मंदिर में दीपक जलाने का निर्देश दिया था। एक दक्षिणपंथी कार्यकर्ता की याचिका पर कार्रवाई करते हुए, न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन ने राज्य के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि पवित्र दीपक पहाड़ी की चोटी पर ही जलाया जाए। हालांकि, सरकारी अधिकारियों ने कहा कि यह कई वर्षों से चली आ रही दीपा मंडपम में दीपक जलाने की पुरानी परंपरा का उल्लंघन है।

 

दिसंबर 2025 के पहले सप्ताह में, मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने याचिकाकर्ता और दस अन्य लोगों को कार्तिकई दीपम जलाने के लिए तिरुप्पारनकुंड्रम पहाड़ी की चोटी पर स्थित दीपम स्तंभ तक जाने की अनुमति देने का निर्देश दिया था। अदालत ने इस अनुष्ठान पर उसके पहले के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन होने पर केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया।

 

पिछले महीने संसद के शीतकालीन सत्र में कई विपक्षी सांसदों ने मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भी सौंपा था।