भारत ने अपने दोहरे टैक्स से बचाव के लिए मॉरीशस से हुए समझौते की एक बडी खामी दूर कर दी है जिससे मॉरीशस के रास्ते भारत में होने वाले निवेश पर सख्ती और बढ़ गई है। इस संबंध में दोहरे कराधान बचाव समझौता, डीटीएए के नए प्रोटोकॉल पर इस साल 7 मार्च को हस्ताक्षर किए गए थे। नवीनतम संशोधन में यह तय करने के लिए एक प्रिंसिपल पर्पस टेस्ट (पीपीटी) शामिल है। यह टेस्ट बताता है कि मॉरीशस स्थित कोई विदेशी निवेशक वास्तव में टैक्स छूट का हकदार है या वह सिर्फ टैक्स फायदों के लिए भारत में निवेश करना चाहता है। डीटीएए एक द्विपक्षीय समझौता है जिसका उद्देश्य एक देश में दूसरे देश के निवासियों द्वारा अर्जित आय पर दोहरे कराधान को रोकना है।