संसदीय चुनाव में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली लागू करने की मांग को लेकर सात इस्लामिक संगठनों ने आगामी दिनों में रैली, जूलूस और विरोध प्रदर्शनों की घोषणा की है। सुरक्षा एजेंसियों को इन कार्यक्रमों से कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
डेली सन समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार को जमात-ए-इस्लामी, इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश और अब्दुल बासित आज़ाद व मामुनुल हक के नेतृत्व वाले खिलाफत मजलिस के दो गुटों ने अपनी कार्ययोजनाएँ जारी कीं। इनमें अगला आम चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर कराने और जातीय पार्टी-जापा तथा अवामी लीग के 14 दलों के गठबंधन सहयोगियों पर प्रतिबंध लगाने की माँग की गई।
इसके अलावा, जातीय गणतांत्रिक पार्टी, बांग्लादेश नेज़ाम-ए-इस्लाम पार्टी और बांग्लादेश खिलाफत आंदोलन ने मंगलवार को तीन दिवसीय कार्यक्रम की घोषणा की, जिसमें बृहस्पतिवार को ढाका में, 19 सितंबर को संभागीय शहरों में और 26 सितंबर को सभी ज़िलों व उपजिलों में विरोध प्रदर्शन शामिल होंगे।
डेली सन की रिपोर्ट के अनुसार, इन आह्वानों के बीच, मंगलवार को ढाका के रमना पुलिस स्टेशन में एक शिकायत भी दर्ज की गई, जिसमें अध्यक्ष जे एम कादर और महासचिव शमीम हैदर पटवारी सहित जापा के 18 वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज करने की माँग की गई।
शेख हसीना सरकार के खिलाफ जुलाई में हुए विद्रोह के दौरान बीएनपी, जमात और अन्य इस्लामी दल एकजुट रहे थे, लेकिन अब चुनावी ढांचे, जुलाई चार्टर के कार्यान्वयन और सुधारों की गति जैसे प्रमुख मुद्दों पर मतभेद उभर आए हैं। इस पृष्ठभूमि में, बीएनपी नेतृत्व ने सतर्क रुख अपनाया है और इस्लामी गुट के साथ खुले टकराव से बचते हुए घटनाक्रम पर कड़ी नज़र रखे हुए है।
विश्लेषकों का मानना है कि विरोध की राजनीति में इस्लामी दलों की बढ़ती भागीदारी ने अगले आम चुनावों से पहले बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य को और जटिल बना दिया है।