जनवरी 3, 2026 6:48 पूर्वाह्न

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प्रधानमंत्री मोदी की प्रगति पहल से 85 लाख करोड़ की परियोजनाओं को मिली रफ्तार: कैबिनेट सचिव

कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने कहा है कि प्रधानमंत्री की सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए बनाई गई प्रमुख पहल-प्रगति से परियोजनाओं और प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी आई है। नई दिल्ली में प्रगति के परिणामों पर मीडिया को संबोधित करते हुए श्री सोमनाथन ने कहा कि अब तक प्रगति की 50 बैठकें हो चुकी हैं और इसके तहत 85 लाख करोड़ रुपये की तीन हजार तीन सौ से अधिक परियोजनाओं की समीक्षा की गई है।

उन्होंने बताया कि परियोजनाओं के अलावा एक राष्ट्र एक राशन कार्ड और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना सहित 61 सरकारी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि 2015 में प्रगति के लागू होने के बाद से, कोरोना, बैंकिंग और बीमा तथा जन धन योजना से संबंधित मुद्दों सहित 36 विभिन्न प्रकार की शिकायतों की समीक्षा की गई है।

कैबिनेट सचिव ने कहा कि प्रगति कार्यक्रम ने परियोजनाओं से संबंधित 7 हजार 735 मुद्दों में से 7 हजार 156 मुद्दों को हल करने में मदद की है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रगति ने जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर बारामूला रेल लिंक परियोजना और ब्रह्मपुत्र नदी पर बोगीबील रेल और सड़क पुल जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को चालू करने में सहायता की है। दिसंबर 2024 में प्रकाशित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के सईद बिजनेस स्कूल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए

श्री सोमनाथन ने कहा कि रिपोर्ट में प्रगति को एक परिवर्तनकारी डिजिटल शासन मंच के रूप में दर्शाया गया है, जिसने शीर्ष स्तर पर जवाबदेही को मजबूत किया है और लंबे समय से लंबित बुनियादी ढांचा और सामाजिक क्षेत्र की परियोजनाओं को गति प्रदान की है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में प्रगति पारिस्थितिकी तंत्र को सहकारी संघवाद में एक संस्था के रूप में प्रस्‍तुत किया गया है जो राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन और केंद्रीय मंत्रालयों को एक मंच पर लाती है।

श्री सोमनाथन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सार्वजनिक परियोजनाओं और योजनाओं में सरकार के सभी स्तरों पर लगने वाले काफी समय और लागत की अधिकता के व्यापक समाधान के रूप में प्रगति की परिकल्पना की थी। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली दस वर्षों से लागू है। हमारे संवाददाता ने बताया है कि प्रगति का उद्देश्य केंद्र और राज्य के बीच समन्वय को बेहतर बनाना है ताकि समस्याओं और बाधाओं का सामना कर रही महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजनाओं को गति मिल सके।