प्रदेशभर में रामनवमी का पर्व श्रद्धाभाव और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। रामनगरी अयोध्या और राम जन्मोत्सव का विशेष उल्लास है। इस अवसर पर आज दोपहर 12 बजकर 16 मिनट पर अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विराजमान भगवान रामलला की प्रतिमा के मस्तक पर सूर्य तिलक जगमगा उठा। श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में यह पहली रामनवमी है।
संपूर्ण विश्व के सनातन धर्मी आज अयोध्या में नवनिर्मित दिव्य और भव्य राम मंदिर में प्राकट्य होते ही रामलला के ललाट पर भगवान दिवाकर के किरणों से रचे तिलक के ऐतिहासिक, अद्भुत और अनूठे दृश्य के साक्षी बने, जिसे देश के पारंगत वैज्ञानिकों ने चार वर्ष के अभ्यास और अनुसंधान से साकार किया। श्री राम संकीर्तन और वेद मंत्रोच्चारण के बीच अपने आराध्य को धरा पर अवतरित होते देख भक्त भाव विभोर होकर जयकारे लगाने लगे। भगवान रामलला को 56 प्रकार के भोग लगाकर प्रसाद सुरक्षा बलों और निर्माण कर्मियों सहित परिसर में उपस्थित 7000 सेवकों और श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।
उधर, चित्रकूट में रामनवमी आस्था और आध्यात्मिक माहौल में मनाई गई।
संपूर्ण विश्व के सनातन धर्मी आज अयोध्या में नवनिर्मित दिव्य और भव्य राम मंदिर में प्राकट्य होते ही रामलला के ललाट पर भगवान दिवाकर के किरणों से रचे तिलक के ऐतिहासिक, अद्भुत और अनूठे दृश्य के साक्षी बने, जिसे देश के पारंगत वैज्ञानिकों ने चार वर्ष के अभ्यास और अनुसंधान से साकार किया। श्री राम संकीर्तन और वेद मंत्रोच्चारण के बीच अपने आराध्य को धरा पर अवतरित होते देख भक्त भाव विभोर होकर जयकारे लगाने लगे। भगवान रामलला को 56 प्रकार के भोग लगाकर प्रसाद सुरक्षा बलों और निर्माण कर्मियों सहित परिसर में उपस्थित 7000 सेवकों और श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।
उधर, चित्रकूट में रामनवमी आस्था और आध्यात्मिक माहौल में मनाई गई।
श्री राम की तपोस्थली चित्रकूट धाम का कोना-कोना रामनवमी पर राममय हो गया है। चित्रकूट के कण-कण में राम निवास करते हैं। श्री राम ने अपने वनवास के साढ़े ग्यारह वर्ष चित्रकूट मे बिताये थे। रामनवमी पर पवित्र मंदाकिनी नदी में आस्था की डुबकी लगाने व कामदगिरि की पूजा अर्चना व परिक्रमा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी हुई है। निर्माेही अखाड़ा से संतो ने भी श्रद्धालुओं के संग भगवान श्री राम की भव्य शोभायात्रा निकाली। वहीं रामघाट पर 11 लाख दीपक जलाकर राम जन्मोत्सव को गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। खास बात है कि इस दौरान बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई है। ताकि दीयों की रोशनी का अद्भुत नज़ारा और ज्यादा दर्शनीय हो सके। दीपों को जलाने की व्यवस्था सामाजिक स्तर पर की गई है।