केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा आयोजित 11वां भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव – आई.आई.एस.एफ आज पंचकूला के दशहरा मैदान में शुरू हुआ। यह महोत्सव 9 दिसंबर तक चलेगा। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और हरियाणा के सामाजिक न्याय तथा अधिकारिता मंत्री श्री कृष्ण बेदी ने भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव का औपचारिक उद्घाटन किया।
आई.आई.एस.एफ का उद्घाटन करते हुए केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हर साल ऐसे महोत्सवों के आयोजन का उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को शिक्षित करना और विज्ञान की उपलब्धियों का उत्सव मनाना है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल करने के बाद भी निरंतरता के महत्व पर बल दिया।
केंद्रीय मंत्री ने विज्ञान प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि इस चार दिवसीय विज्ञान महोत्सव का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को जोड़ना है।
इस अवसर पर अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने विद्यार्थियों और युवा वैज्ञानिकों के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत में विज्ञान के क्षेत्र में काफी प्रगति हो रही है।
भारत का विज्ञान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना भारतीयों के लिए काफी प्रेरणादायक है। उन्होंने अंतरिक्ष में भारत की प्रगति पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अब जब भारत चाँद पर जाएगा, तो वह वहाँ लंबे समय तक रहेगा। उन्होंने सभी भारतीयों से 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने में अपनी भूमिका निभाने का आग्रह किया। मीडिया से बातचीत में अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने कहा कि यह महोत्सव वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का एक बेहतरीन मंच है। डॉ० सिंह ने कहा कि विज्ञान के विकास से भारत अधिक विकसित होगा।
विज्ञान महोत्सव में विज्ञान के विभिन्न पहलुओं से जुड़ी एक प्रदर्शनी भी लगाई गई है। डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि वह भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन प्रदान करने वाले मॉस पौधों की खेती को बढ़ावा दे रही हैं।
इस बार आईआईएसएफ का आयोजन “विज्ञान से समृद्धि: आत्मनिर्भर भारत के लिए” विषय पर किया गया है। विज्ञान महोत्सव का उद्देश्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नवाचार को बढ़ावा देना तथा युवाओं को विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में योगदान के लिए प्रेरित करना है।
इस विज्ञान महोत्सव में भारत के विभिन्न राज्यों से हजारों विद्यार्थियों, युवा शोधकर्ता और विज्ञान प्रेमी भाग ले रहे हैं। इसके अलावा, इसरो, डीआरडीओ और अन्य प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों के वरिष्ठ वैज्ञानिक और शोधकर्ता भी इसमें शामिल हुए हैं। वे विभिन्न सत्रों और संवाद कार्यक्रमों में भाग लेंगे। महोत्सव में वैज्ञानिकों के बीच संवाद सत्र और राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप विभिन्न जनसंपर्क गतिविधियाँ भी शामिल होंगी।