दिल्ली सरकार ने आज कश्मीरी विस्थापितों को दी जाने वाली राहत राशि का सरलीकरण कर दिया है, जिसमें उनकी पारिवारिक आय सीमा को खत्म करना भी शामिल है। यह फैसला कश्मीरी विस्थापितों द्वारा पंजीकरण के दौरान आय सीमा की शर्त और परिवार के रिकॉर्ड जैसी जटिलताओं से छुटकारा दिलाएगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि तीन दशकों से अधिक समय से अपने घरों से दूर रह रहे कश्मीरी हिन्दू विस्थापितों के जीवन में यह फैसला आशा की नई किरण लेकर आया है। दिल्ली सरकार ने न केवल वर्षों से चली आ रही विस्थापित परिवारों की समस्याओं को गंभीरता से सुना, बल्कि उन्हें दूर करने के लिए ठोस कदम भी उठाए। उन्होंने बताया कि सरकार शीघ्र ही उन्हें राहत राशि देने की प्रकिया भी शुरू करेगी।
एक विज्ञप्ति के अनुसार, नई नीति के तहत सरकार ने 26 हजार आठ सौ रुपये की मासिक आय सीमा की शर्त समाप्त कर दी है। अब सभी पंजीकृत कश्मीरी विस्थापित परिवारों को उनकी वर्तमान आय की परवाह किए बिना राहत भत्ता दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत कोई दान नहीं, बल्कि ऐतिहासिक विस्थापन के कारण मिलने वाला अधिकार है, जिसे मानवीय आधार पर सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही विशेष अवसर योजना शुरू की गई है, जिसके तहत सभी परिवार अपने सदस्यों का विवरण एक बार में अपडेट कर पाएंगे। इस प्रक्रिया में पुराने रिकॉर्ड बिना भय और बिना किसी बकाया वसूली के सुधारे जा सकेंगे। इसके अलावा, सरकार ने सितंबर 2025 तक का पूरा बकाया राहत भत्ता जारी करने का भी निर्णय लिया है।