भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-आई.सी.ए.आर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने आज कहा कि विशेषकर वर्षा आधारित क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन के बार-बार होने वाले संकटों के बावजूद भारत की कृषि ने मजबूत लचीलापन दिखाया है।
वे नई दिल्ली में आईसीएआर और बोरलाग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित राष्ट्रीय जलवायु समुत्थान कृषि में नवप्रवर्तन- एन.आई.सी.आर.ए की समीक्षा कार्यशाला और भारतीय कृषि में जलवायु अनुकूलन एटलस – ए.सी.ए.एस.ए-इंडिया के विमोचन के अवसर पर यह बात कही।
डॉ. जाट ने कहा कि भारत का जलवायु लचीलापन विज्ञान, नीतिगत समर्थन, तकनीकी नवाचार और समन्वित कार्यान्वयन के एक एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र पर आधारित है। उन्होंने कहा कि एन.आई.सी.आर.ए और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसी पहलें किसानों की अनुकूलन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कार्यशाला में जलवायु-लचीली कृषि में राष्ट्रीय नवाचार कार्यक्रम के तहत 15 वर्षों की प्रगति की समीक्षा की गई और जलवायु-लचीली कृषि-खाद्य प्रणालियों को मजबूत करने के लिए डेटा-आधारित रूपरेखा पर चर्चा की गई।