केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रल्हाद जोशी ने कहा कि कर्नाटक में मतपत्रों से स्थानीय निकाय चुनाव कराने का निर्णय पीछे की ओर ले जाने वाला कदम है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दशकों की प्रगति को नकारने वाली झूठी बयानबाजी को साबित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि ईवीएम की शुरुआत के कारण बूथ धांधली और बूथ कब्जाना अतीत की बात हो गई है।
मंत्री ने यह भी कहा कि कर्नाटक राज्य विभाग के ज्ञान, दृष्टिकोण और व्यवहार के हालिया सर्वेक्षण में भी स्पष्ट रूप से कहा गया है कि लोगों को ईवीएम पर भरोसा है। जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि कर्नाटक भारत में ईवीएम क्रांति का अग्रणी रहा है। उन्होंने बताया कि 1980 के दशक में बेंगलुरु उन पहले शहरों में से था जहां ईवीएम का प्रायोगिक परीक्षण किया गया था और 1990 के दशक में राज्य ने इसे अपनाने में अग्रणी भूमिका निभाई। श्री जोशी ने कहा कि समय के साथ वीवीपैट के साथ ईवीएम भारत की चुनावी प्रक्रिया की रीढ़ बन गई। उन्होंने दावा किया कि यह निर्णय कांग्रेस शासित राज्य सरकार द्वारा दिल्ली में अपने नेतृत्व को साबित करने और चुनावों के बारे में अपने निराधार दावों को पुष्ट करने के लिए लिया गया था।