उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने भारत की आध्यात्मिक यात्रा और विरासत में जैन दर्शन के योगदान को महत्वपूर्ण बताया है। वे आज कर्नाटक में हासन जिले के श्रवणबेलगोला में जैन संत आचार्य शांति सागर महाराज की स्मृति में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने समाज के आध्यात्मिक लोकाचार को आकार देने वाले जैन धर्म के सिद्धांतों, अहिंसा, संयम और त्याग का स्मरण किया। श्री राधाकृष्णन ने तमिल साहित्य में जैन मुनियों और विद्वानों के योगदान को बहुमूल्य बताया।
उपराष्ट्रपति ने जैन आचार्य शांति सागर महाराज के संबंध में कहा कि उनकी आंतरिक शांति और मोक्ष की खोज सभी को प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि चंद्रगुप्त मौर्य ने भौतिक सुखों का त्याग करने के बाद अपने जीवन के अंतिम वर्ष श्रवणबेलगोला में ही बिताए थे।
श्री राधाकृष्णन ने प्राकृत को शास्त्रीय भाषा घोषित करने और जैन धर्म से संबंधित सभी धार्मिक लिपियों को डिजिटल बनाने के अभियान की शुरुआत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद किया।