अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी-इरेना की सोलहवीं बैठक कल अबू धाबी में संपन्न हुई। तीन दिन के इस आयोजन में विश्वभर के डेढ़ हजार से अधिक मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, कारोबारी और हितधारक शामिल हुए। यह सम्मेलन वैश्विक ऊर्जा नीति में अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
इस दौरान, सदस्यों ने एजेंसी के वर्ष 2026-27 के कार्यक्रम तथा बजट को अपनाया। एजेंसी में अब एक सौ इकहत्तर सदस्य हैं, जिन्होंने इसकी मध्यम अवधि की रणनीति के प्रति समर्थन व्यक्त किया। एजेंसी के महानिदेशक फ्रांसेस्को ला कामेरा ने बैठक का उद्घाटन किया। उन्होंने सदस्य देशों से आग्रह किया कि वे न केवल जलवायु परिवर्तन से निपटने में बल्कि आर्थिक विकास, सुरक्षा और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए भी नवीकरणीय ऊर्जा रणनीतियों को विस्तार दें।
भारत ने इस कार्यक्रम में प्रमुख भूमिका निभाई है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कृषि तथा खाद्य प्रणालियों में नवीकरणीय ऊर्जा को एकीकृत करने में भारत के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वितरित नवीकरणीय समाधानों के विस्तार के माध्यम से भारतीय किसान तेजी से खाद्य और स्वच्छ ऊर्जा के प्रदाता बन रहे हैं।
मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि भारत की पीएम-कुसुम योजना के तहत लगभग दस लाख एकल सौर पंप स्थापित किए गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि 11 लाख से अधिक ग्रिड-कनेक्टेड पंपों को सौर ऊर्जा से संचालित किया गया है, जिससे 10,200 मेगावाट से अधिक स्वच्छ क्षमता का सृजन हुआ है। भारत, अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी का संस्थापक सदस्य है। अबू धाबी में मुख्यालय वाली यह एजेंसी एकमात्र अंतर-सरकारी संगठन है, जो विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा के लिए समर्पित है। यह नीतिगत सलाह, प्रौद्योगिकी सहयोग और ज्ञान साझाकरण के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में कार्य करती है।