देश की खुदरा मुद्रास्फीति सितम्बर के एक दशमलव चार-चार प्रतिशत के मुकाबले कम होकर अक्तूबर में शून्य दशमलव दो-पांच प्रतिशत दर्ज हुई। 2015 में शुरू हुई मौजूदा सीपीआई श्रृंखला की यह सबसे निचली मुद्रस्फीति की दर है। इस श्रृंखला में 2012 के मूल्य स्तरों को रेफरेंस के तौर पर लिया गया है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियांवयन मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्रास्फीति नकारात्मक, शून्य से दशमलव दो-पांच प्रतिशत नीचे रही। वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह दर शून्य दशमलव आठ-आठ प्रतिशत थी। अखिल भारतीय उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति की दर लगातार पांचवे महीने नकारात्मक दर्ज हुई और अक्तूबर में यह माइनस पांच दशमलव एक – आठ प्रतिशत दर्ज हुई। मंत्रालय के अनुसार अक्तूबर में सम्पूर्ण मुद्रास्फीति और खाद्य मुद्रास्फीति दोनों में गिरावट के प्रमुख कारण हैं- वस्तु और सेवा कर-जीएसटी में कटौती, और तेल तथा वसा, सब्जियों, फलों, अण्डों, जूते-चप्पलों, मोटे अनाज और उनके उत्पाद, और यातायात तथा संचार के मूल्यों में गिरावट।