राज्यसभा में आज भारतीय बंदरगाह विधेयक 2025 सर्वसम्मति से पारित हो गया। इस विधेयक का उद्देश्य प्रमुख बंदरगाहों सहित अन्य बंदरगाहों के प्रभावी प्रबंधन के लिए राज्य समुद्री बोर्डों की स्थापना कर उन्हें सशक्त बनाना है। इसके अलावा बंदरगाह क्षेत्र के संरचित विकास को बढ़ावा देने के लिए समुद्री राज्य विकास परिषद की स्थापना करना और बंदरगाहों पर प्रदूषण, आपदा, आपात स्थिति, सुरक्षा, नौवहन तथा डेटा के प्रबंधन की व्यवस्था करना है। यह विधेयक अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के तहत भारत के दायित्वों का अनुपालन सुनिश्चित करेगा। यह बंदरगाह संबंधी विवादों के निवारण और उनसे जुड़े मामलों के समाधान के लिए न्यायिक तंत्र भी स्थापित करेगा।
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एक उत्तर में बताया कि यह विधेयक एक सुधारात्मक पहल है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक सभी तटीय राज्यों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद लाया गया है। श्री सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जल्द ही दुनिया के अग्रणी समुद्री राष्ट्रों में से एक बन जाएगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा और उनका मंत्रालय इसमें महत्वपूर्ण योगदान देगा।
श्री सोनोवाल ने कहा कि यह विधेयक बंदरगाहों से संबंधित कानूनों को सुदृढ़ बनाएगा, एकीकृत बंदरगाह विकास को बढ़ावा देगा, व्यापार को सुगम बनाएगा और देश के समुद्र तट का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करेगा।
भारतीय जनता पार्टी के रामभाई मोकारिया ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य बंदरगाह क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों की क्षमता में 87 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
वाईएसआर कांग्रेस के गोल्ला बाबूराव ने कहा कि केंद्र को विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उचित योजना बनाकर तटीय राज्यों की मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत का समुद्र तट विशाल है और बुनियादी ढाँचे की कमी वाले छोटे बंदरगाहों की देखभाल की जानी चाहिए।
वहीं बीजू जनता दल की सुलता देव ने कहा कि भारत का समुद्री क्षेत्र प्राचीन काल में विकसित था और देश का ओडिशा के माध्यम से जावा, सुमात्रा और बाली से संबंध था। उन्होंने कहा कि पारादीप बंदरगाह देश के बेहतरीन बंदरगाहों में से एक है जिसे और भी विकसित किया जाना चाहिए।
भाजपा की रेखा शर्मा ने कहा कि यह विधेयक समुद्री क्षेत्र के विधायी ढाँचे को नए सिरे से परिभाषित करेगा और भारत को इस सदी में वैश्विक नेतृत्व के लिए तैयार करेगा। उन्होंने कहा कि भारत के प्रमुख बंदरगाहों पर आज 255 मिलियन टन माल की ढुलाई होती है।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सुनीता पवार ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य देश की नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि बंदरगाह 2030 तक कार्बन-मुक्त और प्रदूषण-मुक्त होने चाहिए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि बंदरगाहों का विस्तार करना अनिवार्य है।
भाजपा के धैर्यशील पाटिल, ऑल इंडिया अन्ना डीएमके के एम थंबीदुरई और भारत राष्ट्रीय समिति के रवि चंद्रन वड्डीराजू ने भी चर्चा में हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्य सदन से बाहर चले गए।