अमरीका ने कहा है कि वह फ़िलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को अगले महीने संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के लिए न्यूयॉर्क यात्रा की अनुमति नहीं देगा। इस सत्र में अमरीका के कई सहयोगी देश फिलिस्तीन को अलग देश के रूप में मान्यता देने वाले हैं। अमरीका के विदेश विभाग ने कल एक बयान में कहा कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने फ़लीस्तीन प्राधिकरण-पीए और फ़िलिस्तीन मुक्ति संगठन-पीएलओ के सदस्यों को वीज़ा देने से इनकार किया है।
पीएलओ और पीए को शांति के लिए सहयोगी माने जाने से पहले, उन्हें इस्राइल में 7 अक्तूबर के नरसंहार सहित आतंकवाद को नामंजूर करना होगा और आतंकवाद के लिये उकसाने वाली शिक्षा बंद करनी होगी।
विदेश विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस कार्रवाई का फ़िलिस्तीन के राष्ट्रपति और प्राधिकरण के लगभग 80 अन्य अधिकारियों पर होगा।
इस बीच फ़िलिस्तीन के राष्ट्रपति ने एक बयान में अमरीका द्वारा वीजा न देने के फैसले पर खेद और आश्चर्य व्यक्त किया तथा अमरीका से फैसले पर पुनर्विचार करने और उसे वापस लेने का अनुरोध किया। उधर इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार और संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि डैनी डैनन सहित इस्राइली अधिकारियों ने इस कदम की सराहना की है।
संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र इस मामले पर अमरीका के विदेश विभाग के साथ चर्चा करेगा। श्री दुजारिक ने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि सत्र में सभी सदस्य देशों तथा स्थायी पर्यवेक्षकों का प्रतिनिधित्व रहे।
फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने अगले महीने होने वाली महासभा की बैठक में फ़लीस्तीन को मान्यता देने की योजना की घोषणा की है।