THE HEADLINES ::
⦁ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्रामीण लोगों को सम्मानजनक जीवन देने की अपनी सरकार की प्राथमिकता दोहराई। श्री मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में छह दिवसीय ग्रामीण भारत महोत्सव का उद्घाटन किया।
⦁ India’s rural poverty declines to 4.86 percent in last fiscal, compared to 25.7 percent in 2011-12, says the SBI report.
⦁ भाजपा ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए 29 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की।
⦁ Prakash Utsav marking 358th birth anniversary of Guru Gobind Singh begins in Patna.
⦁ उत्तर भारत में भीषण शीतलहर जारी, मौसम विभाग ने रात के समय घना कोहरा छाये रहने का अनुमान व्यक्त किया।
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now time for our segment DATELINE INDIA in which we take a look at the developments taking place at national or global level. Today we will talk about GRAMEEN BHARAT MAHOTSAV AND WORLD BRAILLE DAY.
“The soul of India lives in its villages”
-Mahatma Gandhi
मां ने अपने दर्द भरे खत में लिखा
सड़कें पक्की हैं अब तो गांव आया कर
– अज्ञात-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गांवों को विकास और अवसर के सजीव केंद्रों में बदलकर ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने के सरकार के दृष्टिकोण पर जोर दिया। प्रधान मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि सरकार गांवों के लोगों को सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की प्राथमिकता के साथ लगातार ग्रामीण भारत की सेवा कर रही है।
The prime minister also added that the government has launched a campaign to ensure basic amenities in every village. The Prime Minister said this while addressing the gathering after inaugurating Grameen Bharat Mahotsav which is being held at Bharat Mandapam in New Delhi from 4th to 9th of January. The theme of this Mahotsav is ‘Building a Resilient Rural India for a Viksit Bharat 2047’.
“A nation’s culture resides in the
hearts and in the soul of its people”
-Mahatma Gandhi
ग्रामीण भारत महोत्सव 2025, वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की एक पहल है।
It is a celebration of Rural India – the soul of India. This event will bring together government officials, thought leaders, rural entrepreneurs, and stakeholders from various sectors to collaborate on initiatives that foster sustainable rural growth.
महोत्सव का उद्देश्य विभिन्न चर्चाओं, कार्यशालाओं और मास्टरक्लास के माध्यम से ग्रामीण बुनियादी ढांचे को बढ़ाना, आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाना और ग्रामीण समुदायों के भीतर नवाचार को बढ़ावा देना है। इसके उद्देश्यों में वित्तीय समावेशन और टिकाऊ कृषि प्रथाओं के साथ, ग्रामीण आबादी के बीच आर्थिक स्थिरता और वित्तीय सुरक्षा को बढ़ावा देना शामिल है जिसमें उत्तर-पूर्व भारत पर विशेष ध्यान देने की बात भी शामिल हैं।
A significant focus of the Mahotsav will be to empower rural women through entrepreneurship; bring together government officials, thought leaders, rural entrepreneurs, artisans and stakeholders from diverse sectors to build a roadmap for collaborative and collective rural transformation; encourage discussions around leveraging technology and innovative practices to enhance rural livelihoods; and showcase India’s rich cultural heritage through vibrant performances and exhibitions.
लोग जीआई प्रमाणित वस्तुओं से लेकर जैविक और जनजातीय उत्पादों तक, ग्रामीण उत्पादों के व्यापक स्पेक्ट्रम पर प्रदर्शनियों का पता लगा सकते हैं। पूरे देश के 180 से अधिक ग्रामीण कारीगरों से जुड़ सकते हैं जो कि हथकरघा और हस्तशिल्प से लेकर ताज़ा उपज तक भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की समृद्ध विविधता का प्रदर्शन करते हैं।
Prime Minister Narendra Modi also emphasized that transformative programs like the Swachh Bharat Abhiyan, PM Awas Yojana, and the Jal Jeevan Mission are enhancing the quality of life in rural areas. Today, clean drinking water reaches households in lakhs of villages, ensuring healthier lives for millions.
Under the Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi (PM-KISAN, financial assistance totaling an impressive 3 lakh crore rupees has been disbursed to farmers, providing them with the means to prosper. The government has also raised agricultural loans by 3.5 times and consistently increased the Minimum Support Price (MSP) for various crops, empowering farmers to grow and thrive.
In a recent State Bank of India’s research on the consumption expenditure survey, India’s rural poverty has declined significantly to 4.86 percent in the financial year 2023-24, compared to 25.7 per cent in 2011-12.
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनौतीपूर्ण समय में हमारे किसानों के लिए सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करते हुए, वर्ष 2025-26 तक प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना को जारी रखने की घोषणा की।
ग्रामीण भारत में डेढ लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएँ ला रहे हैं। इसके अतिरिक्त, डिजिटल प्रौद्योगिकी के साथ, गांवों में अब टेलीमेडिसिन सुविधाओं तक पहुंच है, जो उन्हें देश के कुछ सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरों और अस्पतालों से जोड़ती है।
This Mahotsav symbolizes the aspirations, achievements, and spirit of self-reliance in rural India, reaffirming that the villages are at the core of the nation’s progress.
जैसा कि हम एक उज्जवल भविष्य की ओर देख रहे हैं, सरकार ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने, इसे विकास, लचीलेपन और अवसर के केंद्र में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।
WORLD BRAILLE DAY
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“Live without seeing.
but be what you are.”
– Louis Braille
“दृढ़ संकल्प शारीरिक अभाव पर विजय प्राप्त करता है”
World Braille Day is being observed today. The day is observed annually to raise awareness about the importance of Braille as a means of communication for blind and partially sighted people. The theme for this year’s World Braille Day is “Celebrating Accessibility and Inclusion for the Visually Impaired”.
नेत्रहीन और आंशिक रुप से दृष्टि बाधित लोगों के लिए संचार माध्यम के रूप में ब्रेल के महत्व के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए हर वर्ष 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस मनाया जाता है। 4 जनवरी ब्रेल लिपि के आविष्कारक लुई ब्रेल का जन्मदिन है, जिनका जन्म फ्रांस में 1809 में हुआ था। लुई ब्रेल की याद में और शिक्षा, संचार और सामाजिक समावेशन में ब्रेल के महत्व के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने हर वर्ष 4 जनवरी को विश्व ब्रेल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। 2019 में पहली बार इस दिन को मनाया गया था।
ब्रेल कोई भाषा नहीं है बल्कि यह एक कोड है जिसका उपयोग किसी भी भाषा को लिखने के लिए किया जाता है। ये कोड अलग-अलग अक्षरों, संख्याओं और विराम चिन्हों को दर्शाते हैं।
लुई ब्रेल का जन्म 4 जनवरी, 1809 को फ्रांस के कूपव्रे नाम के छोटे से गांव में हुआ था। 3 साल की उम्र में अपने पिता के औजारों से खेलते हुए एक औज़ार उनकी आँख में लगा जिससे उस आँख की रोशनी चली गई। धीरे-धीरे दूसरी आँख की रोशनी भी चली गई। 10 साल की उम्र में वे पेरिस के रॉयल इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड यूथ में चले गए जहाँ फ़्रांसीसी सेना के अधिकारी कैप्टन चार्ल्स बार्बियर एक प्रशिक्षण के लिये आए और उन्होंने सैनिकों द्वारा अँधेरे में पढ़ी जाने वाली “नाइट राइटिंग” या “सोनोग्राफी” लिपि के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि कैसे युद्ध के समय जब रात के अँधेरे में कोई संदेश देना होता था तो उसके लिए उन्होंने ऐसी लिपि बनाई है जिसे छूकर पढ़ा जा सकता था। लुई ब्रेल ने इसी से प्रेरणा लेकर केवल 15 साल की उम्र में यह लिपि बनाई। 1824 में पूर्ण हुई यह लिपि दुनिया के लगभग सभी देशों में उपयोग में लाई जाती है।
At least 2.2 billion people around the world have a near or distant vision impairment, as per the estimates by the World Health Organization. Nearly one billion or almost half of these cases are the ones where vision impairment could have been prevented or is yet to be addressed.
भारत में, सरकार ने दृष्टिबाधित व्यक्तियों को सशक्त बनाने, उनके अधिकारों, शिक्षा, रोजगार और समग्र कल्याण पर जोर देने के लिए कई पहल की हैं। इनमें दृष्टिबाधित व्यक्तियों के सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय संस्थान की स्थापना, दृष्टिबाधित लोगों के लिए मॉडल स्कूल, ब्रेल विकास इकाई, राष्ट्रीय सुगम्य पुस्तकालय में ब्रेल भाषा को शामिल करना आदि शामिल हैं।
To commemorate World Braille Day, the National Federation of the Blind today organized an event in New Delhi.
Speaking at the event, General Secretary of the National Federation of the Blind, S K Rungta, stressed that nowadays with the advent of technology, people are using Braille as a substitute. He emphasized that technology should rather be used to make Braille accessible to all. He added that Braille is the only way through which visually impaired people lead a respectful life.
Various national-level competitions like Braille reading, Braille writing, and debate were organized for visually impaired students across the nation on the occasion of World Braille Day.
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झारखंड के गढवा जिले का बूढ़ा पहाड़ कुछ समय पहले तक नक्सलियों का गढ़ माना जाता था लेकिन अब यहां सुरक्षा बलों का कब्जा है और इस क्षेत्र में अब पूरी तरह अमन चैन बहाल हो गया है।
कभी उग्रवादियों के गढ़ बूढ़ापहाड़ के क्षेत्र में नक्सलियों की गोलियों की अवाजें गूंजा करती थीं, वहां अब लोग नव वर्ष पर पिकनिक मनाने के लिए पहुंच रहे हैं और हैप्पी न्यू इयर की शुभकामनाओं की गूंज सुनायी पड़ रही है। लोग बताते हैं कि पहले यहां आने में डर लगता था लेकिन अब यहां की मनोरम वादियां उन्हें सकून देती हैं।
पर्यटकों का यह भी कहना है कि इस क्षेत्र को प्रकृति ने काफी फुरसत से सजाया है। इसे पर्यटन स्थल को रुप में विकसित कर स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर विकसित किये जा सकते हैं।
बूढ़ा पहाड़ पर नागरिकों की हलचल बढ़ने से सुरक्षा बल भी उत्साहित है। सीआरपीएफ 172 बटालियन के कमांडेंट एनके सिंह ने कहते हैं कि इस क्षेत्र में लोगों की आवाजाही इस बात का प्रमाण है कि अब यहां पूरी तरह से अमन-चैन लौट आया है।
पुलिस और सीआरपीएफ ने संयुक्त कार्रवाई कर वर्ष 2022 में बूढ़ा पहाड़ को नक्सलियों से मुक्त कराया था। अब यहां सीआरपीएफ का कैंप है और इस क्षेत्र के लोग अब बेखौफ हैं तथा उनतक विकास की किरणें भी पहुंचने लगी हैं।
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In Visakhapatnam, Jyothi Yarraji, a 25-year-old athlete has been honored with the esteemed Arjuna Award this year. As a pioneer in Indian athletics, she has made history by becoming the first Indian woman to qualify for the 100m hurdles at the Paris 2024 Summer Olympics. More from our correspondent:
Jyothi serves as an inspiration to young individuals aspiring to excel in sports, demonstrating remarkable perseverance despite financial challenges. Her passion for athletics ignited during her early years, particularly while attending Port High School, where she began to train and subsequently earned a medal in school competitions. Initially, she competed in three sprint categories before advancing to the national level through participation in the State Sports Authority training camp. In 2019, she joined the Center of Excellence in Guntur, where she had previously been competing nationally without achieving her desired outcomes. Within a single year, she achieved multiple international medals, attained the 24th position in world rankings, and qualified for the Olympics, competing against the world’s top female hurdlers. Jyothi expressed her joy upon receiving the news of her selection for the Arjuna Award. The Arjuna Award, which honors excellence, leadership, and discipline in sports, is set to be presented by the President of India on January 17, 2025, at Rashtrapati Bhavan. This is satyanarayana for parikrama from Visakhapatnam.
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ड्रायवरों को ड्रायविंग में वैज्ञानिक प्रशिक्षण प्रदान करना सड़क सुरक्षा में निवेश है इस तत्त्व के अनुसार पुणे स्थित ड्रायवर प्रशिक्षण और शिक्षा संस्थान (आयडीटीआर) पिछले दस वर्षों से कार्यरत है. ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा स्थापित इस संस्थान ने अब तक देश भर के ड्रायवरों को वैज्ञानिक रूप से ठोस प्रशिक्षण प्रदान किया है.
संगठन का उद्देश्य प्रशिक्षित ड्रायवर तैयार करना है. निजी कंपनियों सहित सरकारी सेवाओं में ड्राइवरों को प्रशिक्षण भी आयडीटीआर के माध्यम से प्रदान किया जाता है. यातायात की वर्तमान स्थिति और दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए अच्छे ड्रायवरों को तैयार करना बहुत आवश्यक हो गया है. यह संगठन प्रशिक्षण कक्षाओं के माध्यम से बेहतर ड्रायवर तैयार कर रहा है तथा आम नागरिकों, मुख्यतः ड्रायवरों को अधिक व्यापक प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है. संगठन ने पुणे के कासरवाड़ी में न केवल अच्छी गुणवत्ता वाली पटरियां स्थापित की हैं, बल्कि अत्याधुनिक प्रणालियां भी स्थापित की हैं. इसमें सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण, औद्योगिक दौरे और तकनीकी शिक्षा शामिल है. इस प्रशिक्षण के दौरान ड्रायविंग प्रशिक्षण के साथ-साथ यातायात कानून, वाहन निर्माण, सड़क सुरक्षा नियम, प्राथमिक चिकित्सा, सड़क निर्माण विशेषताएं और बीमा योजना जैसे विभिन्न उपयोगी पहलुओं की जानकारी प्रदान की जाती है.
यहां महिलाओं के साथ-साथ आम नागरिक, विभिन्न ट्रैवल कंपनियों के ड्रायवर और औद्योगिक क्षेत्र के ड्रायवर भी प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं. यहां विभिन्न कंपनियों की मदद से एक माह का आवासीय पाठ्यक्रम चलाया जाता है. प्रशिक्षुओं के लिए आवास की व्यवस्था संस्थान परिसर के भीतर छात्रावासों में की जाती है. अत्यधिक संवेदनशील सामग्री का परिवहन करने वाले ड्रायवरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है. इस कारण से, भारी वाहन प्रशिक्षु वाहन निर्माण, इंजन डिजाइन और वाहन की बारीकियों को समझने के लिए ऑटोमोबाइल कंपनियों का दौरा करते हैं. यातायात पुलिस के साथ उनके संपर्क पर भी जोर दिया गया है.
ड्रायवर का पद अपेक्षाकृत कम प्रतिष्ठित माना जाता है, इसलिए युवा यह काम करना अधिकतर पसंद नही करते. विदेश से कई लोग यहां प्रशिक्षण ले रहे हैं. हाल ही में महाराष्ट्र सरकार द्वारा जर्मनी में प्रशिक्षित ड्रायवर भेजने के लिए पहल की है. इसके मद्देनजर महाराष्ट्र के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक उम्मीदवारों ने इस संस्थान से यह प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहिए. परिक्रमा के लिए मनोज क्षीरसागर, पुणे.
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आज के जनसंपर्क निदेशालय रक्षा मंत्रालय की ओर से प्रस्तुत डिफेंस न्यूज़ कैप्सूल में आज सुनिए DRDO के अध्यक्ष डॉक्टर समीर वी कामत जी से ब्रॉडकास्टिंग ऑफिसर आनंद सौरभ द्वारा की गई ख़ास बातचीत के प्रमुख अंश।
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खेल
हॉकी इंडिया लीग में आज श्राची राढ़ बंगाल टाइगर्स का मुकाबला दिल्ली एसजी पाइपर्स से होगा। यह मैच शाम छह बजे से शुरू होगा। एक अन्य मुकाबले में हैदराबाद तूफान का सामना गोनासिका से होगा। मैच रात सवा आठ से खेला जायेगा।
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पुण्यतिथि
Death ann….
Rahul Dev Burman (27 June 1939 – 4 January 1994)
आज सबसे पहले हम याद कर रहे हैं एक ऐसे संगीतकार को जिन्हें धुनों का सरताज कहा जाता है। राहुल देव बर्मन जिन्हें हम सब आर डी बर्मन या पंचम दा के नाम से भी जानते हैं। ‘पंचम’… यानि सरगम का पांचवां सुर। कहते हैं कि ये नाम उन्हें अशोक कुमार ने दिया था क्योंकि आर डी जब भी कोई धुन गुनगुनाते थे तब प अक्षर का प्रयोग करते थे। घर में संगीत का माहौल था क्योंकि पिता एस डी बर्मन भी संगीतकार थे और माँ मीरा देव बर्मन तो संगीतकार के साथ ही गीतकार भी थीं। नौ साल की उम्र में उन्होंने पहली धुन बनाई थी जिसे बाद में एस डी बर्मन ने फ़िल्म ‘फ़ंटूश’ में इस्तेमाल किया।
बतौर संगीतकार आर डी की पहली फ़िल्म थी ‘छोटे नवाब’, लेकिन असल पहचान बनी फ़िल्म ‘तीसरी मंज़िल’ और उसके बाद ‘पड़ोसन’ से।
वेस्टर्न म्यूजिक पर तो उनकी पकड़ थी ही लेकिन साथ ही भारतीय शास्त्रीय संगीत की भी गहरी समझ थी। जहाँ एक ओर उन्होंने ‘ओ हसीना ज़ुल्फ़ों वाली’ और ‘दम मारो दम’ जैसे गीत बनाए तो वहीं ‘रैना बीती जाए’ और ‘बीती ना बिताई रैना’ भी ।
Legendary music composer RD Burman has done some amazing work in the industry who transformed Indian music with his innovative style. From jazz to disco, his fearless experimentation made him an icon.
This man saw music in everything – quite literally. From the sound of raindrops to the rhythm of a typewriter, RD could transform everyday sounds into magic.
आर डी की सबसे ख़ास बात थी कि अपने आस-पास की चीज़ों से ऐसा कमाल का संगीत पैदा किया है उन्होंने। कंघी, काँच की बॉटल, गाड़ी का बोनट, स्कूल बेंच, जैसे हर चीज़ में संगीत सुनाई देता था उन्हें। चम्मच को ग्लास पर टकराने से जो आवाज़ निकलती है उसका कितनी ख़ूबसूरती से इस गाने में इस्तेमाल हुआ है
आशा भोसले से उनकी शादी हुई और इस जोड़ी ने एक से बढ़कर एक सुरीले गीत हमें दिए। गुलज़ार और आर डी के combination ने भी कई बेहतरीन albums हमें दिए हैं। वहीं सत्तर के दशक में राजेश खन्ना, किशोर कुमार और आर. डी. की तिकड़ी ने धूम मचा दी थी।
1994 में आज ही के दिन केवल 54 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। लेकिन जाते-जाते भी वो एक और मास्टरपीस हमें देकर गए ‘1942 A Love Story’। इसके लिए उन्हें मरणोपरांत best music director का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। आइए सुनते है इसी फ़िल्म से एक गीत
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जयंती/ जन्मदिवस
गोपालदास नीरज
“आँसू जब सम्मानित होंगे, मुझको याद किया जाएगा
जहाँ प्रेम का चर्चा होगा, मेरा नाम लिया जाएगा”
मानव होना भाग्य है, कवि होना सौभाग्य
ये लिखनेवाले हिंदी के प्रसिद्ध कवि और गीतकार गोपालदास नीरज की आज जयंती है। सच पूछिए तो ऐसे कवि की रचनाओं को पढ़ना और सुनना हमारे लिए सौभाग्य की बात है। नीरज बड़ी सरल भाषा में जीवन की सच्चाई और दर्शन को बयान कर देते थे
जितना कम सामान रहेगा
उतना सफ़र आसान रहेगा
जितनी भारी गठरी होगी
उतना तू हैरान रहेगा
या
खोता कुछ भी नहीं यहाँ पर
केवल जिल्द बदलती पोथी
जैसे रात उतार चांदनी
पहने सुबह धूप की धोती
वस्त्र बदलकर आने वालों! चाल बदलकर जाने वालों!
चन्द खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।
छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ लुटाने वालों
कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है।
1925 में आज ही के दिन उत्तर प्रदेश के इटावा ज़िले के पुरावली गाँव में गोपालदास सक्सेना का जन्म हुआ था, जिन्हे हम और आप सब नीरज के नाम से जानते हैं। उनका पहला काव्य संग्रह 1955 में ‘संघर्ष’ नाम से प्रकाशित हुआ। इसके बाद उनके क़रीब दो दर्जन से अधिक संग्रह प्रकाशित हुए। गीतों का राजकुमार तो उन्हें कहा ही जाता था, साथ ही ग़ज़ल, दोहे, रुबाइयाँ और हाइकू भी उन्होंने लिखे।
फ़िल्मों के लिए भी गीत लिखे जिनमें नई उमर की नई फ़सल, तेरे मेरे सपने, प्रेम पुजारी, मेरा नाम जोकर, शर्मीली जैसी मशहूर फ़िल्में शामिल हैं।
अनुजा कौन भूल सकता है इन गीतों को –
ए भाई जरा देख के चलो, फूलों के रंग से दिल की क़लम से, खिलते हैं गुल यहाँ, रंगीला रे, शोख़ियों में घोला जाए, दिल आज शायर है ग़म आज नग़मा और वो गीत जिसने नीरज को घर-घर में मशहूर कर दिया था ‘कारवाँ गुज़र गया’।
19 जुलाई, 2018 को 93 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। लेकिन अपनी रचनाओं में वे हमेशा हमारे साथ रहेंगे। जैसा उन्होंने ख़ुद लिखा था कि
नीरज तो कल यहाँ न होगा
उसका गीत विधान रहेगा