The Headlines :-
- संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही विभिन्न मुद्दों पर, विपक्षी दलों के हंगामे के कारण कल तक के लिए स्थगित।
- President Draupadi Murmu emphasizes, India’s defence capabilities have captured worldwide attention, driven by its commitment to innovation and self-reliance.
- झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के नेता हेमंत सोरेन आज शाम रांची में चौथी बार झारखण्ड के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
- Curtains to come down on 55th International Film Festival of India with a vibrant closing ceremony in Goa this evening.
- भारत के रिनचेन यूडोल ने बहरीन में पहली विश्व पैरा पूमसे ताइक्वांडो चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा।
- In Badminton, PV Sindhu and Lakshya Sen enter quarterfinals of Singles events at Syed Modi International tournament in Lucknow.
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And, now time for our segment DATELINE INDIA in which we take a look at the developments taking place at national or global level. Today we will talk about
Closing ceremony of 55th International Film Festival of India
This grand finale marks the culmination of nine days of cinematic brilliance, celebrating the art of storytelling and the spirit of global cinema. Featuring over 200 films from 75 countries, masterclasses by industry stalwarts, and inspiring panel discussions, this year’s IFFI has showcased the unifying power of cinema.
समापन समारोह भारत के सिनेमा जगत की जीवंतता और विविधता को प्रदर्शित करेगा। यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारतीय फिल्मों की कलात्मक, रचनात्मक और सांस्कृतिक प्रभाव को श्रद्धांजलि देते हुए उत्सव के बेहतरीन क्षणों को एक साथ पिरोएगा। यह समारोह एक ऐसे माध्यम के रूप में सिनेमा के सार को प्रतिबिंबित करेगा जो सीमाओं से परे है और संस्कृतियों को एकजुट करता है।
This year’s IFFI has been a celebration of cinematic diversity and innovation, featuring a diverse selection of films spanning genres, languages, and cultures, masterclasses by eminent filmmakers, providing unique perspectives on the art and craft of filmmaking and engaging panel discussions on the future of cinema and its role in fostering global cultural exchange.
समारोह में कई फिल्मी हस्तियां भाग लेंगी जो इस अवसर की शोभा बढ़ाएंगी। इसमें सुकुमार, दिल राजू, आनंद तिवारी, अमृतपाल सिंह बिंद्रा और ऑस्ट्रेलियाई निर्माता स्टीफन वोली जैसे प्रतिष्ठित फिल्म निर्माता शामिल हैं।
प्रसिद्ध संगीतकार अमाल मलिक और मामे खान के साथ प्रसिद्ध अभिनेता अल्लू अर्जुन, रश्मिका मंदाना, जया प्रदा, श्रिया सरन, प्रतीक गांधी, समीर कोचर, श्रेया चौधरी, ऋत्विक भौमिक और नवीन कोहली भी उपस्थित होंगे। सिनेमा जगत के दिग्गजों का यह चकाचौंध भरा जमावड़ा इस महोत्सव की सर्वश्रेष्ठ भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म प्रतिभाओं को एक साथ लाने का अदभुत मंच है।
The evening will also feature renowned artists and performers, blending music, dance, and cinematic charm. The ceremony will include music and dance performances by celebrated singers like Stebin Ben, Bhumi Trivedi, and Amaal Malik and actor Shriya Saran, musical storytelling by Nikita Gandhi and Digvijay Singh Pariyar, who will captivate the audience with soulful renditions and energetic performances.
The evening will celebrate exceptional achievements in filmmaking with the presentation of prestigious awards. Honouring the finest cinematic work, the Best Feature film of the festival, will be taking home the most prestigious award of IFFI, the Golden Peacock with the winning team of the Director-producer duo receiving the Golden Peacock Trophy, a certificate, and a cash prize.
देश की समृद्ध नृत्य विरासत का उत्सव मनाते हुए “रिदम्स ऑफ इंडिया” नामक एक मनमोहक प्रदर्शन शाम का केंद्रबिंदु होगा। यह प्रदर्शन दर्शकों को उत्तर भारत का कथक, दक्षिण भारत के मोहिनीअट्टम और कथकली, पूर्वी भारत के मणिपुरी और पुंग चोलम ड्रमर्स और पश्चिम भारत का गरबा जैसे शास्त्रीय नृत्य रूपों के माध्यम से पूरे भारत में एक लुभावनी यात्रा पर ले जाएगा। गतिशील एलईडी दृश्य, कोलम जैसे पारंपरिक रूपांकन और प्रतिष्ठित संगीत अनुभव को और समृद्ध करेंगे, जिसका समापन भारत की विविधता में एकता को प्रदर्शित करने वाले गीत “देस मेरा रंगीला” के साथ भव्य समापन होगा। यह समारोह अगले साल फिर मिलने के वादे के साथ समाप्त होगा।
On the final day of 55th International film festival of India 2024, Closing film Dry Season was screened in two theatres, with this it marks the culmination of movie screenings in this year’s festival. The closing ceremony is just a few hours away which will feature several cinema personalities. The event will also witness the announcement of the Golden Peacock Award other than the several other awards. Earlier, in the day at a special In Conversation session at Kala Academy Goa on the sidelines of IFFI 2024, renowned filmmaker Ramesh Sippy emphasized the importance of professional training and practical experience for aspiring filmmakers. Ramesh Sippy was speaking at Passion for Perfection: Ramesh Sippy’s philosophy session. Addressing the jam packed auditorium Mr Sippy said, young filmmakers must strike a balance between formal education and hands-on experience to excel in the craft.
Discussing the changes in the industry, he remarked that increased budgets, tighter deadlines, and corporate involvement have streamlined the filmmaking process. He said, everything is planned even post-shooting, unlike earlier when there was room for last-minute creativity.
The insightful session and the screening of Dry Season were among the highlights of the festival’s final day. As the curtains draw to a close, IFFI 2024 leaves behind a legacy of celebrating cinematic excellence and fostering meaningful dialogue in the world of film. For Parikrama with Durgesh Bhadauria, Omvesh Upadhyay, Goa.
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दार्जिलिंग पुस्तक मेला
पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र दार्जिलिंग में 29 वाँ जिल्ला पुस्तक मेला सफलता के साथ कल 27 नवम्बर को सम्पन्न हुआ।
पश्चिम बंगाल के पहाड़ी क्षेत्र दार्जिलिंग में 29 वाँ जिल्ला पुस्तक मेला सफलता के साथ कल 27 नवम्बर को सम्पन्न हुआ। दार्जिलिंग के क्यापिटल हल में इस पुस्तक मेलेका विधिवत उद्घाटन 23 नवम्बर को GTA सभा के अध्यक्ष अंजुल चौहान ने किया था। इस पाँच दिवसीय पुस्तक मेले में नेपाली साहित्य जगत के लेखक कवि व पत्रकारों की विशेष उपस्थिति रही। साहित्य से जुड़े विभिन्न संघ संस्था तथा प्रकाशनों ने अपने अपने स्टल लगाए थे। स्टलों पर नेपाली, हिन्दी, बांग्ला, संस्कृत व अंग्रेजी भाषा के विभिन्न पुस्तकें बिक्री हेतु उपलब्ध थीं। बढी संख्या में स्कूल कलेज के विद्यार्थियों की भी उपस्थिति मेले में देखि गई। पुस्तक मेले के पाँचों दिन, लोगों को आकर्षित करने केलिए विभिन्न विषयों पर चर्चा परिचर्चा, नेपाली भाषा व भावी खतरा, सृजनात्मक साहित्य, बाल साहित्य कविता वाचन प्रतीयोगिता , नेपाली साहित्य कल और आज, मानव तस्करी, चित्र बनाओ प्रतिस्पर्धा आदि का आयोजन किया गया। समाज के अनुभवी विज्ञ तथा दक्ष व्यक्तियों ने साहित्य परिसंवाद में सहभागिता करते हुए वर्तमान युवा पीढ़ी में पुस्तक पठन की घटती प्रवृति पर चिन्ता जताई। वर्तमान समय में युवा सामाजिक संजाल गुगल आदि पर अधिक समय व्यतीत कर रहे हैं जिससे उनकी यथार्थ व व्यवहारिक ज्ञान दोनों का स्तर घट रहा है। नेपाली भाषा के संरक्षण व संवर्धन के लिए पुस्तक पढना महत्वपूर्ण है। कारण साहित्य समाज का दर्पण है। विशेष कर, युवावों में पुस्तक पढने के स्वभाव विकास के लिए गोर्खाल्याण्ड क्षेत्रीय प्रशासन, जिल्ला पुस्तकालय व राज्य सरकार का यह संयुक्त पहल काफी कारगर सिद्ध हो रही है, ऐसा मानना है GTA के मुख्य कार्यपाल अनित थापा का। नेपाली भाषा को बढावा देने हेतु इस वर्ष के अगस्त से सभी सरकारी काम काज नेपाली भाषा में करने के निर्देश दिए गए हैं। वर्ष 1996 से आरम्भ इस वार्षिक पुस्तक मेला व इसमें आयोजित चर्चा परिचर्चा का परिणाम है कि अंग्रेजी के बढते प्रचलन से संकट में आई नेपाली भाषा को पुनर जीवित करने व लोकप्रिय बनाने में काफी मदद मिल रही है। परिक्रमा के लिए अशोक चौरसिया, आकाशवाणी कर्सियांग।
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Padma Dolkar, a young folk music and dance artist from Village Wanla of Ladakh is the first Ladakhi awarded with Ustad Bismillah Khan Puraskar for the year, 2023. More from our corrrespondent:
Padma Dolkar, a young folk music and dance artist from Village Wanla of Ladakh is the first Ladakhi awarded with Ustad Bismillah Khan Puraskar, 2023. Dolkar, in her school days got first opportunity in All India Radio and Doordarshan Leh to sing in the children Programme and thus begin her journey in folk music.
Padma thanked all, for the encouragement and constant support to represent Ladakh at National level. Dolkar is seen as an inspiration to revive the folk music in Ladakh. For Parikarma, This is Khursheed Yousuf From Leh ( Union Territory of Ladakh).
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आस्था का महापर्व महाकुंभ 14 जनवरी 2025 से शुरू हो जाएगा। 45 दिनों तक चलने वाले इस पर्व को दिव्य और भव्य बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारियां की हैं। महाकुंभ-2025 का आयोजन न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य की पर्यटन और वैश्विक स्तर पर पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का भी एक बड़ा मौका है।
महाकुंभ में आने वाले संत महंत और श्रद्धालुओं की सुविधा का ख्याल रखा जा रहा है साफ—सफाई से लेकर सुरक्षा तक के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं..लोगों को किसी भी तरह की असुविधा ना हो इस बात का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। आकाशवाणी से बातचीत में प्रयागराज के मेयर गणेश केसरवानी ने कहा कि प्रयागराज में सदियों से माघ मेला, अर्ध कुंभ और कुंभ मेला लगता रहा है यहां के लोग ऐसे आयोजनों के अभ्यासी रहे है। बड़े उत्साह के साथ दिव्य भव्य नव्य हरित और स्वच्छ कुंभ के लिए तैयारी पूरी है सड़कों के चौड़ीकरण के साथ ही दीवारों पर धार्मिक पेंटिग्स करवायी गई है ।
महाकुंभ को देखते हुए प्रयागराज के प्राचीन महत्व बताने वाले स्थलों, घाटों का सौदर्यीकरण किया जा रहा है, जिससे बुनियादी सुविधाओं के साथ ही पौराणिक महत्व वाला यह आयोजन पूरे विश्व को आकर्षित करे। सुशील चंद्र तिवारी, आकाशवाणी समाचार, लखनऊ।
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Business News
Domestic benchmark equity indices today ended with losses of nearly one and half percent, amid weakness in the IT and auto stocks and concerns about global economic trends. The 30-share BSE Sensex tanked 1,190 points, or 1.48 percent, to close at 79,044, while the NSE Nifty50 dropped 361 points, or 1.49 percent, to settle at 23,914. In the Global Crude Market, Brent Crude was trading 0.78 percent up at 73 dollars and 40 cents per barrel, and WTI Crude gained 0.64 percent to trade at 69 dollars and 16 cents per barrel, when reports last came in.
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Sports News
लखनऊ में, सैय्यद मोदी अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन टूर्नामेंट में लक्ष्य सेन पुरूष सिंगल्स और पी वी सिंधू महिला सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में पहुंच गये हैं। शीर्ष वरीयता प्राप्त लक्ष्य ने इजराइल के डेनिल डुबोवेन्को को 21-14, 21-13 से हराकर अंतिम आठ में प्रवेश किया। इसी वर्ग में मीराबा लुआंग मैसनाम और आयुष शेट्टी ने भी अगले दौर में जगह बना ली है। उधर, महिला वर्ग में पी. वी. सिन्धू अपने ही देश की इरा शर्मा को 21-10, 12-21, 21-15 से पराजित कर क्वार्टर फाइनल में पहुंची। इसके अलावा उन्नति हुड्डा और श्रियांशी वालीशेट्टी भी अंतिम आठ में पहुंच गई हैं।
केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के करगिल की पैरा एथलीट रिनचेन यूडॉल ने बहरीन के मनामा में आयोजित पहली विश्व पैरा पूमसे ताइक्वांडो चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। 23 देशों के 140 एथलीटों की वरिष्ठ महिला श्रेणी में खेलते हुए बोधखरबू की रिनचेन ने शानदार प्रदर्शन किया। ताइक्वांडो में यह उपलब्धि हासिल करने वाली वे लद्दाख की पहली एथलीट हैं।
इंडियन सुपर लीग- आईएसएल में आज केरला ब्लास्टर्स एफसी का सामना एफसी गोवा से होगा। यह मुकाबला कोच्चि के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में शाम साढ़े सात बजे शुरू होगा। इससे पहले कल बेंगलुरु एफसी ने मोहम्मडन स्पोर्टिंग क्लब को 2-1 से हरा दिया। इस जीत के साथ ही, बेंगलुरु एफसी ने इस सीजन में कोलकाता के सभी तीन क्लबों को पराजित किया। सुनली छेत्री, इंडियन सुपर लीग में सभी 15 टीमों के खिलाफ गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए।
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Now we will take you on a tour of India’s freedom struggle, and recall events that happened on this day.
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पुण्यतिथि :-
भालजी पेंढारकर
भालजी पेंढारकर (अंग्रेज़ी: Bhalji Pendharkar, जन्म: 1898 – मृत्यु: 28 नवम्बर, 1994) प्रसिद्ध फ़िल्म निर्माता-निर्देशक और पटकथा लेखक थे। इन्हें सन् 1991 में सिनेमा के सर्वोच्च पुरस्कार दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इनका पूरा नाम ‘भालचंद्र गोपाल पेंढारकर’ था।
भालचंद्र गोपाल पेंढारकर ने मराठी फ़िल्मों को जिस तरह संवारा वह अद्भुत है। भारत का पहला देसी कैमरा बनाने वाले बाबूराव ने 1925 में बनाई गई भारत की पहली प्रयोगवादी फ़िल्म ‘सावकारी पाश’ को 1936 में आवाज दी। ‘सिंहगढ़’ की शूटिंग के लिए उन्होंने पहली बार रिफलेक्टर का इस्तेमाल किया। पेंढारकर पुणे के सिनेमाघर में गेटकीपर थे। 1927 में ‘वंदे मातरम आश्रम’ बनाने की वजह से गिरफ्तार हुए पेंढारकर ने 88 साल की उम्र में अपनी मुख्य फ़िल्में—‘नेताजी पालकर’, ‘थोरतंची कमल’, ‘छत्रपति शिवाजी’, ‘मराठा तुतुका मेलवावा’, ‘ताम्ब्डी माटी’ आदि। आखिरी फ़िल्म ‘शाबाश सुनवाई’ बनाई।
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Birendranath Sircar (5 July 1901 – 28 November 1980)
was an Indian film producer and the founder of New Theatres Calcutta. He made Bengali-language films that were noted for introducing many film directors who later became famous. He was awarded the Dada Saheb Phalke Award in 1970 and, the Padma Bhushan, in 1972.
In 1935, P.C. Barua directed and acted in Devdas, based on Saratchandra Chatterjee’s novel Devdas, and this film became phenomenally successful….produced by New Theatres.
Kanan Devi was the first popular star actress, who appeared in many films produced by New Theatres. Also there was a group of talented actors with New Theatres like K.L. Saigal, K. C. Dey, Prithviraj Kapoor, Chhabi Biswas, Bikash Roy, Pahari Sanyal, Basanta Choudhury.
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शंकर शेष
शंकर शेष (अंग्रेज़ी: Shankar Shesh, जन्म: 2 अक्टूबर, 1933, बिलासपुर; मृत्यु- 28 नवम्बर, 1981) हिन्दी के प्रसिद्ध नाटककार तथा सिनेमा कथा लेखक थे। वे नाटक साहित्य क्षेत्र के महत्वपूर्ण नाटककारों में से एक थे। समकालीन परिवेश और युगीन परिस्थितियों से उनके व्यक्तित्त्व की संवेदनशील का निर्माण हुआ था। शंकर शेष बहुआयामी प्रतिभाशाली लेखक के रूप में पहचाने जाते थे। वे मुम्बई में एक बैंक में हिन्दी अधिकारी थे। उनके ‘फन्दी’, ‘एक था द्रोणाचार्य’, ‘रक्तबीज’ आदि नाटकों से उनकी ख्याति बढ़ी थी। उनका शोध-प्रबंध ‘हिन्दी मराठी’ कहानीकारों के तुलनात्मक अध्ययन पर आधारित था। शंकर शेष अत्यन्त सहृदय और गुट-निरपेक्ष लेखक थे। उनके द्वारा रचित ‘घरोंदा’ कथा पर हिन्दी में एक प्रसिद्ध फ़िल्म भी बनी थी।
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BIRTH ANN…………………….
Pudipeddi Ravi Shankar (born 28 November 1966)
also known as Kempegowda Ravi, Armuga Ravishankar, Bommali Ravi Shankar or Sai Ravi is an Indian film actor, dubbing artist, director and writer.
He rose to fame with the 2011 blockbuster Kempe Gowda. He has also acted in a few Telugu and Tamil films.
He dubbed for over 2600 films with more than 1000 films each in Telugu and Tamil languages.
He dubbed for over 150 Kannada films. He is the brother of actor Saikumar Pudipeddi.
He won nine state Nandi Awards for Best Male Dubbing Artist and two Tamil Nadu State Film Award for Best Male Dubbing Artist.
He made his directorial debut with the Kannada film Durgi in 2004.
He also worked as a dialogue writer and penned dialogues for over 75 Telugu films and 150 Tamil films.
He also worked as a playback singer for films such as Rakta Charitra and Bejawada.
He won his first Filmfare Award for his performance in the film Kempe Gowda that gave him a big break in his acting career.
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अमर गोस्वामी
अमर गोस्वामी (अंग्रेज़ी: Amar Goswami; जन्म- 28 नवम्बर, 1945, मुल्तान (अविभाजित भारत); मृत्यु- 28 जून, 2012, गाज़ियाबाद) हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार तथा उपन्यासकार थे। वे ‘मनोरमा’ और ‘गंगा’ जैसी देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं से लंबे समय तक जुड़े रहे थे। अमर गोस्वामी साहत्यिक संस्था ‘वैचारिकी’ के संस्थापक भी रहे। उन्होंने कई साहित्यिक पत्रिकाओं का संपादन भी किया था।
कार्यक्षेत्र
अमर गोस्वामी ने एक प्राध्यापक के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में भी अपना योगदान दिया था। महिलाओं की बहुचर्चित पत्रिका ‘मनोरमा’ में उन्होंने बतौर उप-संपादक अपनी सेवाएँ प्रदान की थीं। उन दिनों कथाकार अमरकांत इस पत्रिका के संपादक थे। ‘मनोरमा’ में लगभग 6 वर्ष तक काम करने के बाद अमर गोस्वामी दिल्ली चले गए।
कृतियाँ
अमर गोस्वामी जी की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं-
कहानी संग्रह – हिमायती, महुए का पेड़, अरण्य में हम, धरतीपुत्र, महाबली, अपनी-अपनी दुनिया, कल का भरोसा, भूल-भुल्लैया, उदास राघवदास, बूजो बहादुर, इक्कीस कहानियाँ।
बाल साहित्य – ‘शाबाश मुन्नू’ सहित बच्चों की कहानियों की कुल सोलह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
अनुवाद – बांग्ला भाषा से हिन्दी में अनूदित 50 से भी अधिक पुस्तकें
उपन्यास – इस दौर में हमसफर
अनुवाद – बांग्ला से हिन्दी में साठ से अधिक अनूदित पुस्तकें प्रकाशित
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Pramod Karan Sethi (28 November 1927 – 6 January 2008)
was an Indian orthopaedic surgeon. With Ram Chandra Sharma, he co-invented the “Jaipur foot”……in 1969.
The Jaipur foot is a rubber-based prosthetic leg for people with below-knee amputations….but yes an inexpensive and flexible artificial limb. Jaipur Foot provides free prosthetic limbs to those in need, enabling them to regain mobility. He was awarded the Magsaysay Award for Community Leadership in 1981 and the Padma Shri by the Government of India in 1981.
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प्रमोद करण सेठी
प्रमोद करण सेठी (अंग्रेज़ी: Pramod Karan Sethi, जन्म: 28 नवंबर, 1927, बनारस; मृत्यु: 6 जनवरी, 2008, जयपुर) जयपुरिया पैर (कृत्रिम पैर) का निर्माण करने वाले प्रसिद्ध भारतीय चिकित्सक थे, जो रेमन मैग्सेसे पुरस्कार व पद्मश्री से सम्मानित थे।
डॉक्टर प्रमोद करण सेठी का जन्म 28 नवम्बर 1927 को बनारस, उत्तर प्रदेश में हुआ था। इनके पिता का नाम डॉक्टर एन. के. सेठी था जो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर थे। डॉक्टर प्रमोद करण सेठी ने आगरा विश्वविद्यालय से सात विषयों में सर्वोच्च अंकों के साथ एमबीबीएस की परीक्षा में सफल रहे और 1952 में मास्टर ऑफ सर्जरी (एमएस) की उपाधि हासिल की। डॉ. सेठी ने 1954 में इंग्लैंड के एडिनबरा से एफ.आर.सी.एस की डिग्री भी ली थी। प्रमोद करण सेठी दुनियाभर में मशहूर जयपुरिया पैर (कृत्रिम पैर) के जनक थे। श्री रामचन्द्र शर्मा के साथ मिलकर उन्होंने सन 1969 में जयपुरिया पैर नामक सस्ता एवं लचीला कृत्रिम पैर प्रमोद करण सेठी (अंग्रेज़ी: Pramod Karan Sethi, जन्म: 28 नवंबर, 1927, बनारस; मृत्यु: 6 जनवरी, 2008, जयपुर) जयपुरिया पैर (कृत्रिम पैर) का निर्माण करने वाले प्रसिद्ध भारतीय चिकित्सक थे, जो रेमन मैग्सेसे पुरस्कार व पद्मश्री से सम्मानित थे।
डॉक्टर प्रमोद करण सेठी का जन्म 28 नवम्बर 1927 को बनारस, उत्तर प्रदेश में हुआ था। इनके पिता का नाम डॉक्टर एन. के. सेठी था जो काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर थे। डॉक्टर प्रमोद करण सेठी ने आगरा विश्वविद्यालय से सात विषयों में सर्वोच्च अंकों के साथ एमबीबीएस की परीक्षा में सफल रहे और 1952 में मास्टर ऑफ सर्जरी (एमएस) की उपाधि हासिल की। डॉ. सेठी ने 1954 में इंग्लैंड के एडिनबरा से एफ.आर.सी.एस की डिग्री भी ली थी। प्रमोद करण सेठी दुनियाभर में मशहूर जयपुरिया पैर (कृत्रिम पैर) के जनक थे। श्री रामचन्द्र शर्मा के साथ मिलकर उन्होंने सन 1969 में जयपुरिया पैर नामक सस्ता एवं लचीला कृत्रिम पैर का विकास किया।
सम्मान और पुरस्कार
डॉक्टर प्रमोद करण सेठी हड्डी रोग विशेषज्ञ थे और मैग्सेसे व पद्मश्री पुरस्कारों से सम्मानित थे। जयपुर के नाम पर रखे गए ‘जयपुर फुट’ अस्पताल को पूरी दुनिया में इतने लोगों ने इस्तेमाल किया कि डॉक्टर सेठी को इसके लिए ‘गिनेस बुक ऑफ वर्ल्ड रेकार्ड’ में स्थान दिया गया। मशहूर अभिनेत्री सुधा चंद्रन को भी जयपुर फुट अस्पताल से ही नई ज़िंदगी मिली थी।
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